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Nalanda Diary
Quarterly Newsletter of Nalanda University, Bihar, India
सहभागिता संवाद की प्रथम बैठक
सहभागिता संवाद : परिकल्पना एवं पहल

सहभागिता संवाद की प्रथम बैठक: विद्यालय–विश्वविद्यालय सहयोग की सशक्त शुरुआत
राजगीर, बिहार; 6 जुलाई 2025 | नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित सहभागिता संवाद की प्रथम बैठक विश्वविद्यालय और स्थानीय शैक्षणिक समुदाय के बीच संवाद, सहयोग और साझा दृष्टि को सुदृढ़ करने वाला एक महत्वपूर्ण आरंभ सिद्ध हुई। राजगीर परिसर में आयोजित इस बैठक में आसपास के क्षेत्र के 20 से अधिक प्रतिष्ठित सरकारी एवं निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक और शिक्षाविद् सम्मिलित हुए। केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, सरस्वती विद्या मंदिर, डॉ. बी. आर. अंबेडकर 10+2 राजकीय बालिका आवासीय विद्यालय (राजगीर), केरल पब्लिक स्कूल (पिलखी) सहित अनेक संस्थानों की सहभागिता ने इस संवाद को व्यापक और प्रतिनिधिक स्वरूप प्रदान किया। नालंदा विश्वविद्यालय के विद्वानों के साथ प्रख्यात लेखक एवं शिक्षाविद् प्रो. वेंकटरमन राव की उपस्थिति ने अकादमिक विमर्श को और समृद्ध किया।
बैठक के दौरान विद्यार्थियों के कौशल-विकास, करियर मार्गदर्शन, विद्यालयों में मेंटरशिप की आवश्यकता तथा नालंदा विश्वविद्यालय में अपनाई गई सतत विकास की पहलों—विशेषकर सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और नेट-ज़ीरो कैंपस दृष्टि—पर गहन चर्चा हुई। यह भी रेखांकित किया गया कि विद्यालयी शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच निरंतर एवं संरचित सहयोग से विद्यार्थियों को समग्र, समावेशी और भविष्य-उन्मुख शिक्षा प्रदान की जा सकती है।
माननीय कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में प्राचीन नालंदा की संवादात्मक परंपरा को स्मरण करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की वास्तविक शक्ति उसके समुदाय से जीवंत रूप में जुड़े रहने में निहित है। उन्होंने स्थानीय विद्यालयों के साथ नियमित अकादमिक संवाद, विद्यार्थियों के लिए परिसर भ्रमण, विषय-आधारित कार्यशालाओं और साझा संसाधन उपयोग को आगे बढ़ाने पर बल दिया, ताकि ज्ञान का प्रवाह विद्यालयों और विश्वविद्यालय के बीच द्विपक्षीय रूप से सशक्त हो सके।
इस प्रथम सहभागिता संवाद ने भविष्य की साझी पहलों की ठोस आधारशिला रखी। विद्यालय प्रतिनिधियों ने इसे स्थानीय शिक्षा तंत्र के लिए एक मार्गदर्शक मंच बताते हुए निरंतर संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। नालंदा विश्वविद्यालय के लिए यह पहल उसकी उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें अकादमिक उत्कृष्टता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व, सामुदायिक सहभागिता और साझा सीख को समान महत्व दिया गया है।
इसके साथ ही बैठक में यह सहमति बनी कि सहभागिता संवाद को केवल एक मंच न मानकर एक सतत प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत शिक्षकों के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम, विद्यार्थियों के लिए अनुभवात्मक सीख आधारित गतिविधियाँ तथा विद्यालयों के साथ संयुक्त अकादमिक परियोजनाएँ आरंभ करने पर विचार किया गया। यह भी प्रस्तावित हुआ कि विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों और विभागों की विशेषज्ञता को स्थानीय विद्यालयों की आवश्यकताओं के अनुरूप जोड़ा जाए, ताकि शिक्षण–अधिगम की गुणवत्ता में ठोस और मापनीय सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
सहभागिता संवाद की यह प्रथम बैठक नालंदा विश्वविद्यालय की उस व्यापक दृष्टि को प्रतिबिंबित करती है, जिसमें ज्ञान को सीमित परिसरों तक न रखकर समाज के साथ साझा करने पर बल दिया गया है। यह पहल विश्वविद्यालय को स्थानीय समुदाय का सक्रिय बौद्धिक साझेदार बनाते हुए विद्यार्थियों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सामाजिक संवेदनशीलता को विकसित करने की दिशा में एक दूरगामी कदम सिद्ध हुई।
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