जुलाई 2025 से नालंदा विश्वविद्यालय और राजगीर स्थित डॉ. बी. आर. अंबेडकर आवासीय विद्यालय के बीच विकसित हुआ सतत् सहयोग सहभागिता की उस भावना का जीवंत उदाहरण है, जो निरंतरता, उद्देश्य और पारस्परिक अधिगम पर आधारित है। यह सहभागिता केवल एकल संपर्क गतिविधियों तक सीमित न रहकर एक संरचित संस्थागत साझेदारी के रूप में विकसित हुई है। इस सहयोग के अंतर्गत नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा विद्यालय की छात्राओं के लिए सततता-केंद्रित कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की गई, जिनमें अपशिष्ट पृथक्करण, जिम्मेदार उपभोग और दैनिक पर्यावरणीय व्यवहार जैसे व्यावहारिक विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इन सत्रों के माध्यम से सततता की अवधारणा को सैद्धांतिक स्तर से निकालकर व्यवहारिक जीवन से जोड़ा गया। इस प्रक्रिया में विकसित सस्टेनेबिलिटी बॉक्स ने विद्यालय को अपनी दैनिक संस्थागत प्रक्रियाओं में पर्यावरण-अनुकूल आदतों को व्यवस्थित रूप से समाहित करने में सहयोग प्रदान किया।
सहयोग का एक अन्य महत्वपूर्ण स्तंभ करियर मार्गदर्शन सत्र रहे, जिनके माध्यम से छात्राओं को उच्च शिक्षा के मार्गों और व्यावसायिक संभावनाओं से प्रारंभिक स्तर पर परिचित कराया गया। डॉ. बी. आर. अंबेडकर आवासीय विद्यालय की छात्राओं का नालंदा विश्वविद्यालय परिसर भ्रमण इस दिशा में निर्णायक सिद्ध हुआ, जहाँ उन्होंने कक्षाओं, पुस्तकालय और अकादमिक वातावरण का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया तथा विद्वानों से संवाद किया। इन अंतःक्रियाओं ने नालंदा विश्वविद्यालय की मार्गदर्शक संस्थान के रूप में भूमिका को और सुदृढ़ किया। यह सहयोग सह-पाठ्यक्रमीय और सृजनात्मक क्षेत्रों तक भी विस्तारित हुआ। नालंदा पुस्तक मेले में सहभागिता तथा निबंध, चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्राओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और स्वतंत्र चिंतन के अवसर प्राप्त हुए। इन गतिविधियों ने छात्राओं के सीखने के परिवेश को समृद्ध किया और विश्वविद्यालय को कक्षा से परे रचनात्मकता को पोषित करने की दृष्टि प्रदान की।
संस्थागत स्तर पर दोनों संस्थानों के बीच संरचित अकादमिक संवाद आयोजित हुए, जिनकी अध्यक्षता नालंदा विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ने की। ये संवाद प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सार्थक, सम्मानजनक और समाधान-उन्मुख रहे, जिनमें सरकारी आवासीय विद्यालय की वास्तविकताओं, कार्यान्वयन की चुनौतियों और संभावित समाधानों पर खुलकर चर्चा हुई। आगामी चरण में यह साझेदारी वर्षा जल संचयन, संरचित अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण-संवेदनशील परिसर व्यवहार जैसी पहलों के संयुक्त क्रियान्वयन की परिकल्पना करती है, जो सीख के लिविंग लैबोरेटरी के रूप में कार्य करेंगी। समग्र रूप से यह सहयोग दर्शाता है कि विश्वविद्यालय और विद्यालय समान भागीदार के रूप में शैक्षणिक एवं सामाजिक उद्देश्यों को आगे बढ़ा सकते हैं। सहभागिता के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय और डॉ. बी. आर. अंबेडकर आवासीय विद्यालय ने ऐसा सहभागिता मॉडल गढ़ा है, जिसमें ज्ञान का प्रवाह द्विदिश होता है और भविष्य के लिए अवसर, आकांक्षा तथा उत्तरदायी नागरिकता का विस्तार होता है।